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बैंकिंग प्रणाली: कार्य, प्रकार और भारतीय संदर्भ
बैंकों के मुख्य कार्य, साख सृजन की प्रक्रिया, बैंकों के प्रकार और भारत में RBI के नियामन ढांचे की स्पष्ट समझ।
बैंक क्या है? वित्तीय मध्यस्थ की भूमिका
बैंक वह वित्तीय संस्था है जो जनता से जमा स्वीकार करती है और ऋण देती है। बैंक की मूल भूमिका वित्तीय मध्यस्थ की है — जिनके पास अतिरिक्त धन है (बचतकर्ता) और जिन्हें धन चाहिए (उधारकर्ता) के बीच सेतु। बचतकर्ता अकेले उधार देने में जोखिम, जानकारी की कमी और तरलता की समस्या झेलते; बैंक हज़ारों जमाकर्ताओं का धन एकत्र कर जोखिम बांटता है, उधारकर्ताओं की जांच करता है और जमाकर्ता को जब चाहे निकासी की सुविधा देता है। इस मध्यस्थता से बचत उत्पादक निवेश में बदलती है, जो आर्थिक वृद्धि का ईंधन है। बिना बैंकों के आधुनिक अर्थव्यवस्था की कल्पना कठिन है।
बैंक = वित्तीय मध्यस्थ। बचतकर्ताओं का धन एकत्र कर उधारकर्ताओं तक पहुंचाना और दोनों के जोखिम-तरलता का प्रबंधन करना ही बैंकिंग का सार है।
बैंकों के मुख्य कार्य
पहला मुख्य कार्य जमा स्वीकार करना है — बचत खाता, चालू खाता, सावधि जमा और आवर्ती जमा जैसे विभिन्न रूपों में। दूसरा, ऋण और अग्रिम देना — व्यक्तिगत, आवास, वाहन, कृषि और व्यावसायिक ऋण; बैंक जमा पर दिए जाने वाले ब्याज से अधिक दर पर ऋण देता है और अंतर (स्प्रेड) उसकी आय है। तीसरे, एजेंसी कार्य — ग्राहकों की ओर से चेक संग्रह, बिल भुगतान, धन हस्तांतरण। चौथे, सामान्य उपयोगिता सेवाएं — लॉकर, विदेशी मुद्रा, बीमा और म्यूचुअल फंड वितरण। पांचवां, साख सृजन — आंशिक नकद कोष प्रणाली में बैंक जमा से कई गुना ऋण दे सकते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति बढ़ती है।
साख सृजन: बैंक मुद्रा कैसे बनाते हैं
साख सृजन बैंकिंग की सबसे आश्चर्यजनक प्रक्रिया है। मान लीजिए कोई व्यक्ति बैंक में 100 रुपये जमा करता है और बैंक को 10% नकद कोष रखना है। बैंक 10 रुपये रखकर 90 रुपये ऋण देता है; वह ऋण किसी दूसरे के खाते में जमा होता है, जिससे अगला बैंक 9 रुपये रखकर 81 रुपये ऋण देता है — यह श्रृंखला चलती रहती है। अंततः 100 रुपये की प्रारंभिक जमा से 1000 रुपये तक की कुल जमा (मुद्रा) बन सकती है। मुद्रा गुणक = 1 ÷ नकद कोष अनुपात। यही कारण है कि केंद्रीय बैंक नकद कोष अनुपात (CRR) बदलकर अर्थव्यवस्था में ऋण और मुद्रा की मात्रा को नियंत्रित करता है। यह शक्ति ही बैंकिंग नियामन को इतना महत्वपूर्ण बनाती है।
बैंकों के प्रकार
वाणिज्यिक बैंक (सार्वजनिक, निजी और विदेशी) आम जनता और व्यवसायों को सेवाएं देते हैं — ये बैंकिंग प्रणाली की रीढ़ हैं। सहकारी बैंक (शहरी और ग्रामीण) सदस्यों के स्वामित्व में होते हैं और कृषि व छोटे उद्यमों को ऋण देते हैं। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित होते हैं। विकास बैंक (जैसे NABARD, SIDBI) दीर्घकालिक कृषि, उद्योग और लघु उद्यम वित्तपोषण करते हैं। लघु वित्त बैंक और भुगतान बैंक वित्तीय समावेशन के लिए बनाए गए विशेष वर्ग हैं — भुगतान बैंक जमा तो ले सकते हैं पर ऋण नहीं दे सकते। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) बैंक जैसी कुछ सेवाएं देती हैं पर मांग जमा स्वीकार नहीं कर सकतीं।
भारत में बैंकिंग नियामन की रूपरेखा
भारत में बैंकिंग का नियामन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) करता है, जिसे बैंकिंग विनियमन अधिनियम के तहत व्यापक शक्तियां प्राप्त हैं। RBI बैंकों को लाइसेंस देता है, नकद कोष अनुपात (CRR) और वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) तय करता है, पूंजी पर्याप्तता मानदंड लागू करता है और बैंकों का निरीक्षण करता है। जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए जमा बीमा (DICGC) है, जो निर्धारित सीमा तक जमा की गारंटी देता है। प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (priority sector lending) के माध्यम से बैंकों को कृषि, लघु उद्योग और समाज के कमज़ोर वर्गों को ऋण देने के लिए बाध्य किया जाता है। यह नियामन ढांचा वित्तीय स्थिरता और वित्तीय समावेशन — दोनों लक्ष्यों को साधता है।
मुख्य बिंदु
- बैंक वित्तीय मध्यस्थ है — बचतकर्ताओं और उधारकर्ताओं के बीच सेतु
- मुख्य कार्य: जमा स्वीकारना, ऋण देना, एजेंसी सेवाएं, साख सृजन
- साख सृजन: आंशिक कोष प्रणाली में प्रारंभिक जमा से कई गुना मुद्रा बनती है; गुणक = 1 ÷ कोष अनुपात
- बैंक ब्याज दर अंतर (स्प्रेड) से आय अर्जित करते हैं
- भारत में RBI नियामक है; CRR/SLR, पूंजी मानदंड और जमा बीमा स्थिरता के उपकरण हैं
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बैंक लाभ कैसे कमाते हैं?
मुख्यतः ब्याज दर अंतर (स्प्रेड) से — वे जमा पर कम ब्याज देते हैं और ऋण पर अधिक ब्याज लेते हैं। इसके अलावा सेवा शुल्क, कमीशन और निवेश से भी आय होती है।
साख सृजन क्या है?
आंशिक नकद कोष प्रणाली में बैंक अपनी जमा का एक हिस्सा कोष में रखकर शेष को ऋण के रूप में देते हैं, जो फिर जमा बनता है। इस श्रृंखला से प्रारंभिक जमा से कई गुना मुद्रा सृजित होती है। मुद्रा गुणक नकद कोष अनुपात का व्युत्क्रम होता है।
CRR और SLR क्या हैं?
CRR (नकद कोष अनुपात) वह हिस्सा है जो बैंकों को अपनी जमा का RBI के पास नकद रखना होता है। SLR (वैधानिक तरलता अनुपात) वह हिस्सा है जो तरल संपत्तियों (जैसे सरकारी प्रतिभूतियों) में रखना होता है। दोनों साख सृजन और तरलता को नियंत्रित करते हैं।
भुगतान बैंक और सामान्य बैंक में क्या अंतर है?
भुगतान बैंक जमा स्वीकार कर सकते हैं और भुगतान सेवाएं दे सकते हैं, लेकिन ऋण नहीं दे सकते। वे वित्तीय समावेशन के लिए बनाए गए हैं। सामान्य (वाणिज्यिक) बैंक जमा और ऋण दोनों का कारोबार करते हैं।